
तमिलनाडु की सियासत में जो बात कल तक सोची भी नहीं जा सकती थी वो अब वास्तविकता के करीब लग रही है. करीब छह दशकों तक एक-दूसरे की धुर विरोधी रहीं डीएमके और अन्नाडीएमके एक साथ महागठबंधन बनाकर सत्ता शेयर कर सकती हैं. जनादेश तो लेकिन इनको मिला नहीं हैं, फिर ऐसा कैसे होगा? लेकिन तमिलनाडु के सियासी गलियारे से जो खबर आ रही है वो यही कह रही है कि राज्यपाल के आग्रह और कांग्रेस की जल्दबाजी ने नए सियासी समीकरण को हवा दे दी है.
234 सीटों में से 108 सीटें जीतने वाली एक्टर विजय की पार्टी को बहुमत के लिए 118 का मैजिक नंबर चाहिए. विजय खुद दो सीटों से जीते हैं, इस कारण उनकी पार्टी टीवीके की वास्तविक संख्या 107 ही है. ऐसे में यदि विधानसभा का 233 का आंकड़ा बनता है तो भी उनको बहुमत के लिए 10 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है.
इस सूरतेहाल में नतीजों के 24 घंटों के भीतर कांग्रेस ने पहला बड़ा मूव लेते हुए स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएमके खेमे को छोड़ने का ऐलान कर दिया और टीवीके के साथ अपना नाता जोड़ लिया. कांग्रेस के 5 विधायक हैं. टीवीके और कांग्रेस का आंकड़ा बढ़कर 112 हो गया. अब 5 अन्य विधायकों के समर्थन की जरूरत रह गई. कांग्रेस के दांव ने डीएमके को नाराज कर दिया और उन्होंने इसको पीठ में छुरा घोंपने वाला कदम बताया. कांग्रेस के दांव की धमक दिल्ली तक सुनी गई.
बुधवार शाम को अपने इसी संख्याबल को लेकर विजय राज्यपाल से मिलने पहुंचे और सरकार बनाने का दावा पेश किया. विजय का गणित ये है कि उनको सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए और वो गुरुवार या शुक्रवार तक शपथ ले लें तो उनके लिए आगे की राह आसान होगी. लेकिन गवर्नर ने कहा कि पहले आप बहुमत के आंकड़े को लिखित में दीजिए. इससे विजय के शपथ ग्रहण प्रोग्राम पर फिलहाल ब्रेक लग गया. अब उनको शपथ से पहले बहुमत के आंकड़े का लेटर गवर्नर को देना पड़ेगा. जाहिर है कि पांच विधायकों की अभी भी उनको जरूरत है.




